प्राचीन काल से ही मानव ओर प्राकृति का घनिष्ठ सम्बंध रहा है। भोजन वस्त्र आवास की समस्याओ का समाधान भी इन्ही से हुआ। व्रक्षों से भोजन के रूप मे फल व्रक्षों की छाल  व पत्तियों से प्राचीन काल मे मानव ने अपने शरीर को ढका  इनकी लकडियो व पत्तियों से अपने घर की छत बनायी व कागज की पूर्ति की।

प्राकृति का सबसे अच्छा उपहार वन है। वनो स हमे सजीव निर्जीव दोनों ही प्रकार की चीज़ों की कल्पना करना ही बड़ा मुश्किल है । जनम स लेकर म्रत्यु तक वनो की लकड़िया ही काम आती है।  पेड़ पौधो से हमे अनाज जड़ी बूटी फल फूल

तिलहन आदि प्राप्त हुए। पेड़ पौधो से हमे शुद्ध वायु प्राप्त होती है व परीयवरण को संतुलित बनाये रखने मे सहायक होते है ।सरकार न भी वनो की रक्षा क लिए कड़े कदम उढ़ाये। स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद वन महोत्सव कार्यक्रम चलाया गया। पेड़ पौधो को काटना कानूनन अपराध है । सरकार द्वारा कई राज्यो मे राष्ट्रिए ऊथान भी स्थापित किए गए पर हर कोशिश सरकार की नाकाम सी होती दिखाई पड़ी क्योकि कोई भी इसपर ज्यादा ध्यान नही दे पा रहा था फिर सरकार न एक ऐसा अभियान चलाया जिसने सबको प्रेरित किया जिस का नाम हरित भारत रखा गया जिस अभियान के अंर्तगत हर वर्ग को जोड़ा गया व व्रक्षों के महत्वों को समझाया हमारे संस्थान क चेरमेन श्री राकेश सिंघल जी को भी व्रक्षों से बड़ा लगाव है। जिस क कारण हमारी संस्था मे चारों तरफ हरियाली है ।बहुत सारे व्रक्षों से प्रकृति की जलवायु मे एक योगदान दिया। सरकार द्वारा चलाये गए अभियान “हरित भारत” मे योगदान दिया इन्होने अपनी संस्था की टीम को स्कूलो व कॉलेजो मे भेज कर व्रक्षारोपण कराया व वहा के बच्चों को व्रक्षारोपण के लिए प्ररित किया व ये भी समझाया की अपने हर एक जनम दिवस पर एक व्रक्ष लगाया व अपने आस पास के लोगो को भी व्रक्षारोपण के लिए प्ररित करो जिस से हमे व हमारी आने वाली पीढ़ी को स्वच्छ जलवायु व अन्य संसाधन प्राप्त हो सके।

हर जन्मदिन पर व्रक्ष लगाये व भारत को हरा भरा बनाये